बुधवार, 26 फ़रवरी 2014

शिव की,महिमा

शिव  जी बहुत भोले है,
 भोले भंडारी कहलाते है
उनकी  महिमा है निराली
 सबके दुःख  हरते है
लोगो को सुख देकर
बाकी  विष वो पीते है
सब  तेरे दर्शन को तरसे
सब तुझसे मिलने को आये
कहा है भोले दर्शन दो
देश में हो रहा अत्याचार,
मिटा दो अंधकार
क्यों बेबस है जनता
क्यों नहीं पीते   विष  प्याला
विष है धन,  जिसने छीना
अमन चैन
हर कोई एक दुसरे का प्यासा
कहा गया वो भाईचारा
शिव तेरे इस संसार में
बहुत हो गए रावण अब
लो फिर से अवतार तुम
हो सके फिर भाईचारा
तुम ही मिटा सकते हो
 अँधियारा
भोले तुम हो कहा 

4 टिप्‍पणियां:

राजेंद्र कुमार ने कहा…

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (28.02.2014) को " शिवरात्रि दोहावली ( चर्चा -1537 )" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें, वहाँ आपका स्वागत है। महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ।

हिमकर श्याम ने कहा…

भक्ति रस से सराबोर रचना ...जो सच्चे मन से शिव की आराधना करता है उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है...महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ...

कालीपद प्रसाद ने कहा…

बहुत सुन्दर गीत प्रार्थना .शिवरात्रि की शुभकामनाएं !
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निवेदिता श्रीवास्तव ने कहा…

महाशिवरात्रि की शुभकामनायें .....