गुरुवार, 30 अक्तूबर 2014

नया सवेरा

नया सवेरा आया
बहुत सारी  खुशियाँ  लाया
पर्वत पर छायी लाली
दुनिया में एक नया दिन आया
सब तरफ छायी खुशियाँ
नया सवेरा आया
सबके घर  में आने वाली ढेर सारी खुशियाँ
भागेगा अँधेरा आयेगा उजाला
सबको मिलेगी अपनी मंजिल
गरीबी जायेगी सबके हाथो होगी तरक्की
नया सूरज लाया अपार खुशियाँ
बच्चो को मिली उनकी खुशियाँ
सबको मिला पढ़ने का अधिकार
देश का दिन भी है बदलने वाला
नया सूरज सबके लिए लाया
ढेरो खुशियाँ
हर तरफ है खुशियाँ बिखरी
सबके आँगन महका
नया सवेरा आया

5 टिप्‍पणियां:

राजेंद्र कुमार ने कहा…

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (31.10.2014) को "धैर्य और सहनशीलता" (चर्चा अंक-1783)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

Darshan jangra ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी है और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - शुक्रवार- 31/10/2014 को
हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः 42
पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया आप भी पधारें,

शिवनाथ कुमार ने कहा…

नया सवेरा हमेशा अपने संग नवऊर्जा और आशाएँ लेकर आता है
बहुत सुन्दर रचना !

ऋषभ शुक्ला ने कहा…

very nice.

http://hindikavitamanch.blogspot.in/

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत सुन्दर